चिकित्सीय निदान मिलना ही काफी तनावपूर्ण है। फिर सवाल उठता है: *"क्या मुझे अब भी बीमा मिलेगा?"*
छोटा जवाब: हाँ, लेकिन नियम बदल जाते हैं। आप शायद “स्टैंडर्ड” बॉक्स में न फिट हों, फिर भी दरवाज़ा बंद नहीं होता। बस रणनीति बदलनी होती है।
गोल्डन रूल: जो है उसे बनाए रखें
मौजूदा पॉलिसी कभी कैंसल न करें। वह आपके उस समय के स्वास्थ्य पर आधारित है। नया निदान होने पर बीमाकर्ता न तो पॉलिसी रद्द कर सकता है, न प्रीमियम बढ़ा सकता है, न नए exclusions जोड़ सकता है।
अगर प्रीमियम भारी लगे, तो पहले sum insured घटाएँ या indexation हटाएँ। पॉलिसी lapse होने पर वही terms वापस मिलना मुश्किल है।
नई वास्तविकता: Loading और Exclusion
जब आप *नई* कवर के लिए आवेदन करते हैं, तो नया मेडिकल इतिहास बताना कानूनी ज़िम्मेदारी है। आमतौर पर तीन outcomes होते हैं:
1. Loading के साथ स्वीकार
पूरी कवर मिलती है, लेकिन प्रीमियम ज्यादा होता है।
2. "[Exclusion](/blog/understanding-insurance-exclusions)" के साथ स्वीकार
सब कुछ कवर, सिर्फ आपकी pre‑existing condition नहीं।
3. Deferred
इलाज पूरा होने तक आवेदन रोका जा सकता है।
Group Cover का रास्ता
कई कंपनियों में Group Insurance Schemes होते हैं। वहाँ AAL के तहत बिना मेडिकल सवालों के कवर मिल सकता है।
पूरी Disclosure ज़रूरी है
न्यूज़ीलैंड कानून के अनुसार सही जानकारी देना ज़रूरी है। भूल भी हुई तो दावा रद्द हो सकता है।
Guaranteed Acceptance (Last Resort)
ये products बिना मेडिकल सवालों के मिलते हैं, लेकिन महंगे होते हैं और stand‑down period होता है।
अकेले मत जाएँ
Insurance Adviser के साथ काम करने से approval की संभावना बढ़ती है।
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